Supreme Court: 'लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना, पायजामे का नाड़ा खींचना रेप की ही कोशिश'; सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

'लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना, पायजामे का नाड़ा खींचना रेप की ही कोशिश'; सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, लगाई फटकार

Supreme Court Sets Aside Allahabad High Court Verdict

Supreme Court Sets Aside Allahabad High Court Verdict

Supreme Court on HC Verdict: किसी लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा खींचना रेप की ही कोशिश है, न की केवल रेप की तैयारी। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक विवादित फैसले को पलटते हुए यह टिप्पणी की है। इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट को कड़ी फटकार भी लगाई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मार्च, 2025 में यह फैसला सुनाया था। जिसकी काफी आलोचना भी हुई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले से हंगामा मच गया था। वहीं एनजीओ 'वी द वीमेन' द्वारा इस मामले में लिखे गए  लेटर के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का खुद संज्ञान लिया था और अब पिछले बुधवार को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया।

दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कासगंज की 14 साल की एक नाबालिग लड़की से जुड़े एक मामले में ब्रेस्ट पकड़ना, पायजामे का नाड़ा खींचना, उसे पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश, इसे केवल गंभीर अश्लील हरकत बताया था और जिसके बाद मामले में शामिल आरोपियों की सजा हल्की कर दी गई थी। अब हाईकोर्ट के इस फैसले को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में शामिल 2 आरोपियों के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत रेप की कोशिश का केस लगाते हुए सजा का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एन वी अंजारिया की 3 जजों की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित फैसले को खारिज किए जाने का आदेश सुनाया।

CJI सूर्यकांत की बेंच ने कहा, हाईकोर्ट ने तय क्रिमिनल लॉ के सिद्धांतों का गलत इस्तेमाल किया है, इस आधार पर बेंच ने निचली अदालत के स्पेशल जज द्वारा IPC की धारा 376 और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट की धारा 18 के तहत  पहले से जारी किए गए ओरिजिनल समन को बहाल कर दिया। जिसमें नाबालिग लड़की की मां की शिकायत पर CrPC के सेक्शन  156(3) के तहत एक एप्लीकेशन पर कार्रवाई करते हुए, कासगंज के POCSO के स्पेशल जज ने दो आरोपियों को IPC के सेक्शन  376 और POCSO एक्ट के सेक्शन 18 के तहत समन जारी किया था।

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के इस समन ऑर्डर में बदलाव कर दिया था और यह माना था कि असल आरोपों से रेप करने की कोशिश का पता नहीं चलता है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि आरोपों को बदलकर आरोपियों पर IPC की धारा 354B (कपड़े उतारने के इरादे से हमला या क्रिमिनल फोर्स का इस्तेमाल) के छोटे चार्ज के साथ POCSO एक्ट की धारा 9/10 (गंभीर सेक्सुअल असॉल्ट) के तहत मुकदमा चलाया जाए। यह बदलाव इस आधार पर किया गया कि ' रेप की तैयारी और कोशिश' में फर्क होता  है और यह मामला 'रेप की तैयारी' वाला था। हाईकोर्ट ने तर्क दिया कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सिर्फ 'तैयारी' के थे और 'कोशिश' के नहीं.

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CJI की बेंच की टिप्पणी

हाईकोर्ट के फैसले को लेकर CJI की बेंच ने कहा कि किसी महिला को गलत नियत से पकड़ना, उसके ब्रेस्ट पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा खोलना महज छेड़छाड़ या रेप की तैयारी नहीं बल्कि सीधे तौर से रेप की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट ने preparation और attempt में अन्तर स्पष्ट करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में जो बातें कही गई हैं, उन्हें देखते हुए हम हाईकोर्ट के इस नतीजे  से सहमत नहीं हो सकते कि आरोप सिर्फ़ रेप के अपराध की तैयारी के हैं, कोशिश के नहीं। पहली नज़र में ही आरोपियों की कोशिश साफ़ तौर पर और ज़रूरी तौर पर हमें इस नतीजे पर ले जाती है कि, यह रेप करने की कोशिश का मामला बनता है। यह देखते हुए कि आरोपी ने रेप सिर्फ थर्ड पार्टी के दखल की वजह से नहीं किया, कोर्ट ने माना कि ये काम सिर्फ ' रेप की तैयारी' नहीं बल्कि 'रेप की कोशिश' थी।

समझ की भावना और सहानुभूति का माहौल रखिए

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजारिया ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में फैसले के लिए कानूनी तर्क और सहानुभूति दोनों की जरूरत होती है। इसलिए महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने के दौरान जजों में ज्यादा संवेदनशीलता लाने की जरूरत है। वहीं CJI सूर्यकांत ने अपने फैसले में लिखा कि जजों के प्रयास केवल संवैधानिक और कानूनी सिद्धांतों के सही इस्तेमाल तक ही सीमित नहीं होने चाहिए बल्कि उन्हें दया और सहानुभूति का माहौल भी बनाना चाहिए और उनमें इंसानियत और समझ की भावना भी दिखनी चाहिए। इनमें से किसी भी बुनियादी बात की कमी से न्यायिक संस्थाएं अपनी जरूरी जिम्मेदारियां ठीक से नहीं निभा पाएंगी।

क्या था पूरा मामला?

दरअसल कासगंज की एक महिला ने जनवरी 2022 में वहां की जिला अदालत में एक शिकायत दर्ज कराई। महिला ने बताया कि घटना 10 नवंबर 2021 की है. जब वह अपनी 14 साल की बेटी के साथ अपने एक रिश्तेदार के घर गई हुई थी। वहां से शाम को लौटते वक्त रास्ते में आरोपी पवन और आकाश मिले। पवन ने बेटी को बाइक से घर छोड़ देने की बात कही। महिला ने भरोसा करके बेटी को बाइक पर बैठा दिया। आरोप है कि रास्ते में एक सुनसान जगह ले जाकर आरोपी पवन और आकाश ने बेटी के साथ गलत हरकत की।  आरोपियों ने नाबालिग को पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश की। उसके ब्रेस्ट पकड़े और उसके पायजामे का नाड़ा खींचा।